GST New Rules: भारत सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नियमों में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है। 1 अप्रैल 2025 से इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (आईएसडी) प्रणाली लागू की जाएगी। इस बदलाव का उद्देश्य राज्य सरकारों को एक केंद्रीय स्थान से प्रदान की जाने वाली साझा सेवाओं पर टैक्स को सही ढंग से एकत्र करने में सहायता करना है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) एक ऐसा तंत्र है जो कारोबार को उनकी आउटपुट टैक्स लाईबिलिटी के विरुद्ध खरीद पर भुगतान किए गए कर को ऑफसेट करने की इजाजत देता है। इस क्रेडिट का इस्तेमाल केवल कारोबारी उद्देश्यों के लिए खरीदे गए सामान या सेवाओं पर भुगतान किए गए जीएसटी के लिए किया जा सकता है। आईटीसी का कुशल यूज कारोबार के समग्र कर बोझ को कम करने में मदद करता है, तो आइये इसके बारे में जानते है।
कौनसे नियम 1 अप्रैल से होंगे लागू
इस साल एक जनवरी से प्रयोगात्मक तौर पर 20 करोड़ से अधिक टर्नओवर वालों के लिए एमएफए को लागू किया गया था। फिर गत एक फरवरी से पांच करोड़ टर्नओवर वालों के लिए अनिवार्य किया गया। अब एक अप्रैल से सभी यूजर्स के लिए इसे अनिवार्य किया जा रहा है।
ISD मैकेनिज्म का उद्देश्य
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य टैक्स रेवेन्यू का सही वितरण सुनिश्चित करना है। जब व्यवसाय कई राज्यों में काम कर रहे होते हैं तो यह सिस्टम उनके लिए फायदा पहुंचाता है। इस प्रणाली के तहत व्यवसाय अपनी एक हेडक्वार्टर में कॉमन इनपुट सर्विस के इनवॉइस को केंद्रीकृत कर सकते हैं। इससे उन शाखाओं के बीच इनपुट टैक्स क्रेडिट का सही तरीके से वितरण किया जा सकेगा जो शेयर्ड सर्विसेज का उपयोग करती हैं।
इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ
इनपुट टैक्स क्रेडिट वह टैक्स होता है जो व्यवसाय अपनी खरीद पर चुकाते हैं। इस टैक्स को वे अपने आउटपुट टैक्स से घटा सकते हैं जिससे उनकी कुल जीएसटी देनदारी कम हो जाती है। नए नियमों के तहत ISD सिस्टम का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है ताकि ITC का सही वितरण हो सके।
नए नियमों की विशेषताएँ
व्यवसायों के पास कॉमन ITC को अपने अन्य GST रजिस्ट्रेशन में आवंटित करने के लिए दो विकल्प थे – ISD मैकेनिज्म या क्रॉस-चार्ज मेथड लेकिन अब 1 अप्रैल 2025 से यदि कोई व्यवसाय ISD सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करता है तो उसे रेसिपिएंट लोकेशन के लिए ITC नहीं दी जाएगी।
इसके अलावा यदि ITC का गलत वितरण होता है तो टैक्स अथॉरिटी ब्याज सहित राशि वसूल करेगी और इसके लिए जुर्माना भी लगाया जाएगा। जुर्माना ITC की राशि के बराबर हो सकता है या 10,000 रुपए से अधिक हो सकता है।
नया GST सिस्टम
दावा किया जा रहा है कि, यह बदलाव जीएसटी सिस्टम को और अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ISD सिस्टम न केवल राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू का सही वितरण करेगा बल्कि व्यवसायों को भी अपनी टैक्स देनदारियों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद करेगा। इस कदम से टैक्स चोरी को रोकने और सिस्टम में पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी।
नियमों का पालन न करने पर क्या होगा
अगर कोई व्यवसाय इसका इस्तेमाल नहीं करता है तो लोकेशन के लिए रेसिपिलिएन्ट लोकेशन के लिए आईटीसी प्रदान नहीं किया जाएगा। इस सिस्टम ने उन कारोबार को लाभ होगा जो विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैं। आईएसडी नियमों का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।